शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

वो जो मैं थी

ये जो
तुम हो
तुम ही बाक़ी हो मुझ मेँ..
वो जो
मैं थी
वो तो मर गई तुम पर.!

कुछ सफर ऐसे होते है


तुम पास बैठे भी दूर
रहते हो मुझ से कितना
लेकिन मैं जानती हूँ
हर दिन पास आ रहे हो तुम
बस एक दिन होश में न रहना तुम
फिर चल देंगे उन रास्तो पर
जो न कहीं जाते है न पहुँचते है
कुछ सफर ऐसे भी होते है

भूगोल

क्या किया अब तक
बस भूगोल ही जांचा
औरत का
नाप ली एक ही झटके में
एक ही नज़र से
सब आगे पीछे ऊंचाई गहराई
माददा नहीं है तुम्हारा 
उसके दिल और दिमाग की
गहराईयों का उत्खनन करने का
तभी तो तुम्हारा इतिहास अधूरा है
और मेरा सब ज्ञान पूरा है
औरत न जान पाओगे
गर भूगोल में घूमने जाओगे
सुनीता धारीवाल

चले आये क्यों

इतना तो जानती हूँ मैं
मुसाफिर हो
कहाँ रुक पाओगे तुम
यूँ ही किसी मोड़ पर
फिर मिल जाओगे तुम
ठोकरों के हवालों से
भला क्या डर जते हम
इतने भर से ही
कहाँ  डगमगाते हम
हम तो प्यार में भी जख्मी 
सरे आम हुए है
जब जिस संग चाहां
वहां बदनाम हुए है
इतने कमजोर नहीं कि
टूटने के खौफ से चटक जाते
हम तो चूर चूर हो
कर भी बन आये है
जाना ही था तो
चले आये क्यूँ
पाना न था तो
खो आये क्यूँ
खुद से डरते हो
या खुदाई से डरते हो
अँधेरे से डरे हो या
परछाई से डरते हो
हम कुचले भी है
छलनी छलनी हम भी है
ये अलग बात है
तेरे लायक हम नहीं है

बुधवार, 1 नवंबर 2017

मुलाकात

सच मे आप से मुलाकात
जिंदगी से मुलाकात होती है
आपका प्यार से देखना मुझे
सबसे बड़ी सौगात होती है
मैं कहीं भी रहूं कही चल दूँ
बस तुम्हारी बात होती है
तुम्हारे संग गुजरे हर  पल
रूमानी आस होती है
तुम्हे पा कर भी बिरहा की
तड़प और प्यास होती है

तू जिंदगी सा लगता है

ए दोस्त
तू मुझे जिंदगी सा लगता है
तेरे मन  का है नूर
जो मेरे चेहरे पर झलकता है
तेरी बातों  में
तेरे  जीवन का तप झलकता है
तेरी नजर ए इनायत से
रोम रोम मेरा महकता है
तेरी आँखों मे सच्चाई
तेरा ईमान चमकता है
इश्किया रूह के कारण  
तेरा चेहरा दमकता है
मुझ से कोई पूछ कर देखे
तू मुझको कितना जंचता है
मैं तेरी हो नही सकती
तू मेरा हो तो सकता है
तू है तो मन मे मेरे
असंख्य  दीपों का  उजाला  है
शक्ति  मेरे भीतर है
प्रेम मेरी ज्वाला है
कोई पूछे  कैसे मैने
अपना यह दिल सम्भाला है

शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2017

मैं कभी कभी # यात्रा

यह बड़ा असामान्य मानसिक  व्यवहार है मेरा दिमाग एक ही समय मे कई सतहो पर सक्रिय रहता है हर सतह स्वतंत्र काम करती है और तेजी से ।विचार बोध अति सक्रिय होता है conciuos माइंड और subconcious दोनो एक ही समय मे सक्रिय रहते है और sub concious की भी कई परते एक ही समय मे सक्रिय रहती है मैं किसी भी micro सेकंड में इन सब मे खुद को शिफ्ट कर लेती हूं अभी जो संसार मे हो रहा है दिख रहा है उस मे होती हूँ दूसरे पल subconcious की यात्रा शुरू ।न सामने कुछ दिखता है न सुनता है सामने वाले को पता ही नही चलता मैं क्या कह सुन रही हूं हो सकता है मैंने उसकी बात सुनी ही न हो  अनेक बार होता है ।भीतरी तहों में विचरण अच्छा लगता है पास्ट से बात कर रही हूं या किसी कल्पना से बात में मग्न होती हूं पर सामान्य नही होती ।ऐसी हो चुकी हूं मैं
सभी को लगता है मैं ठीक हूँ मस्त हु हो सकता है उसी वक्त मैं किसी पीड़ा भरी लेयर में दर्द से लबरेज महसूस कर रही होती हूँ । हां मगर सब निचली तहों में कहीं भी उत्साह या बहुत खुशी नही कभी महसूस हुई ये सब सिर्फ concious लेयर में ही महसूस होता है ।किसी तह में तो सिर्फ अंधेरा किसी मे खामोशी किसी में जल्दी होती है उम्र पूरी करने की किसी मे मैं यात्रा पर होती हु अजनबी से ब्रह्मांड में ।अजीब सा अनुभव है शायद सभी को यह नही होता होगा ।फाइनली मेरे दिमाग मे कोई लोचा जरूर है बिगाड है कोई ।जितनी भी मैंने श्रेष्ठ रचनाएं या क्रिएटिव काम किये है वो भी इन निचली तहों की देन है