बेमतलब भाग दौड़ बचाई जा सकती थी
तेज धूप मे जलना कहाँ जरूरी था
धूप पर्दों मे छुपाई जा सकती थी
साहस था समझदारी नदारद निकली
थोड़ी रहती तो उम्मीद बचाई जा सकती थी
उसने सब खोया बस हमसे मुहब्बत कर के
उसकी भी जान बचाई जा सकती थी
सब कुछ गवा के होश मे आना ही न हुआ
होश की भी कोई दवा बनाई जा सकती थी
मुड़ के देखने मे रीढ़ मे ऐंठन सी होती है
सामने देख कर पगडण्डी बनाई जा सकती है
सुनीता धारीवाल