बुधवार, 29 जनवरी 2025

केंचुली से मित्रता कब तक ?


सुनो ...और एक दिन सांप भी केंचुली उतार देता है आगे बढ़ जाता है कितना गहरा अर्थ है इस में 
समय के साथ सांप की लंबाई बढ़ती है पर केंचुली की नहीं ।और केंचुली पर परजीवी अपना बसेरा करने लगते है सांप को संक्रमण होने लगता है  उसकी चाल रुकने लगती हूं वो छटपटाता है  सांप परेशान होता है वह केंचुली को अपने दांतों से रगड़ कर उतारने लगता है वे पेड़ो से घिसता है खुद को ..पत्थरों से घिसता है खुद को और वह केंचुली उतार देता है वहीं छोड़ आगे बढ़ जाता है ।
भले मनुष्य अतीत की केंचुली साथ लिए फिरेंगे तो आगे चलेंगे कैसे नई त्वचा का आनंद ले ही नहीं सकेंगे । पुरानी केंचुली चिपकाए हम छटपटा रहे है घुट रहे हैं ये केंचुली अतीत की गलतियां है गुनाह है असफलताएं है पश्चाताप है आत्म ग्लानि हैं और हम इन्हें हम अपनी पीठ पर लादे हुए सरकने की कोशिश कर रहे है हमारी चमकती बलखाती देह  की स्पीड हम भूल गए हैं बस केंचुली की जड़कन में तने हुए इंतजार कर रहे है कि घुटन से तो अच्छा है जग से चले जाएं ।कोई हमारी केंचुली उतारने नहीं आएगा । लोग बेचारा कह कर आगे चल देंगे ।हमने अपने दांतों से खुद ही अपनी केंचुली पर प्रहार करना है बार बार करना है तोड़ना है इसे पत्थरों से पेड़ो से रगड़ना है जमीन पर लोट लोट कर इसको तोड़ना है खुद ही तब ही हम मुक्त होंगे तमाम तरह से परजीवियों से संक्रमणों से बोझ से।वक्त लगेगा पर केंचुली उतर जाएगी ।तंग रास्तों पर चलें ऊबड़ खाबड़ पर चलें कांटो में चले तो यह केंचुली जल्दी उतर जाएगी । फिर मिलेगी ताजी हवा ताजी त्वचा को और फिर घुटन नहीं होगी ।बस बोझ जो लिए फिरते हो उतार दो ।हल्के हो जाओ ।दौड़ने लगोगे ।चमकदार शीशे की तरह चमक दोबारा मिलेगी ।
समझ गए होंगे सब 
चलो अब सांप के बारे में जान लो 


सांप अपनी त्वचा यानी केंचुली उतारता है क्योंकि उसकी त्वचा उससे साथ नहीं बढ़ती. सांप की त्वचा खराब होने पर, या जब उस पर परजीवी लग जाते हैं, तब वह केंचुली उतारता है. सांप की केंचुली उतारने की प्रक्रिया को इक्डीसिस कहते हैं. 
सांप केंचुली उतारने के कारण: 
सांप की त्वचा खराब हो जाती है.
सांप के शरीर पर परजीवी लग जाते हैं.
सांप के शरीर का विकास होता है.
सांप को संक्रमण से मुक्ति मिलती है.
सांप केंचुली उतारने का तरीका:
सांप अपने जबड़ों की मदद से केंचुली उतारता है. 
सांप जंगल में चट्टानों, पेड़ों के ठूंठों, या पौधों के मज़बूत तने से अपने शरीर को रगड़ता है. 
सांप पानी के पास जाता है और केंचुली उतारता है. 
सांप की केंचुली से जुड़ी कुछ और बातें:
सांप की केंचुली का इस्तेमाल कई तरह की दवाओं और दवाओं की रिसर्च में किया जाता है. 
मध्य प्रदेश की कुछ जनजातियां चर्म रोगों में सांप की केंचुली का इस्तेमाल करती हैं. और भी बहुत उपयोग हैं सांप की केंचुली के फिर कभी और जिक्र करेंगे 


सुनीता धारीवाल 

"केंचुली उतारो, नया जीवन पाओ"

सांप की केंचुली, जीवन दर्शन, आत्म-मुक्ति, अतीत का बोझ, बदलाव, नया जीवन, प्रेरणादायक विचार, आत्म-परिवर्तन, संघर्ष, मानसिक शुद्धि, आत्म-सुधार

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मंगलवार, 21 जनवरी 2025

सुबह की पहली किरण: क्या करते है विभिन्न देशों के लोग क्या होती है उनकी प्रातः की दिनचर्या ?

सुबह की पहली किरण: अलग-अलग देशों की खास सुबह की परंपराएं Morning stories 



सुबह का समय हर किसी के जीवन में बेहद खास होता है। यह दिन की शुरुआत करने और सकारात्मक ऊर्जा पाने का अवसर है। हर देश की सुबह की अपनी एक अनूठी कहानी है, जो उनकी परंपराओं, संस्कृति और जीवनशैली को दर्शाती है। आइए, दुनिया के अलग-अलग देशों की सुबह की पहली गतिविधियों पर नज़र डालते हैं और देखते हैं कि यह कैसे उनके जीवन को रंगीन बनाती है।


1. भारत: आध्यात्मिकता से भरी सुबह

भारत की सुबह अक्सर प्रार्थना, ध्यान और योग से शुरू होती है। गुनगुनी चाय या मसाला चाय के साथ दिन की शुरुआत करना भारतीयों का पसंदीदा है। गांवों में लोग सुबह जल्दी उठकर खेतों में काम करते हैं या पशुओं की देखभाल करते हैं। भारत की सुबह आध्यात्मिकता और कड़ी मेहनत का संगम है।

2. जापान: सादगी और अनुशासन का मेल

जापान में सुबह का समय सादगी और अनुशासन का प्रतीक है। लोग ग्रीन टी के साथ हल्के स्ट्रेचिंग या "राजियो तैसो" (रेडियो एक्सरसाइज) करते हैं। घर को साफ-सुथरा करना और पारंपरिक नाश्ता तैयार करना जापानी जीवनशैली का हिस्सा है।

3. अमेरिका: भागदौड़ और कैफीन की शुरुआत

अमेरिका की सुबह तेजी और कैफीन से भरी होती है। कॉफी के कप के साथ लोग ईमेल चेक करते हैं या ताजा खबरें पढ़ते हैं। काम पर जाने से पहले वर्कआउट और हल्का नाश्ता भी सुबह की दिनचर्या में शामिल है।


4. फ्रांस: धीरे-धीरे जीवन का आनंद

फ्रांस की सुबह शांत और आरामदायक होती है। लोग एक कप कॉफी और क्रोइसेंट या जैम के साथ बगेट का आनंद लेते हैं। घर पर या किसी कैफे में बैठकर इस नाश्ते का स्वाद लेना फ्रेंच लाइफस्टाइल का हिस्सा है।


5. चीन: प्रकृति और सेहत का संगम

चीन में सुबह अक्सर ताई ची या पार्क में सैर से शुरू होती है। यह न केवल फिटनेस के लिए अच्छा है बल्कि प्रकृति से जुड़ने का भी तरीका है। इसके बाद पारंपरिक नाश्ता जैसे कॉन्जी या स्टीम्ड बन्स लिया जाता है।

6. मैक्सिको: मसालों और परंपराओं की सुबह

मैक्सिको में सुबह का नाश्ता जीवंत और स्वादिष्ट होता है। "कैफे डी ओल्ला" (दालचीनी के साथ मसालेदार कॉफी) और चिलाक्विल्स या टैमालेस जैसे पारंपरिक व्यंजन सुबह का हिस्सा हैं। यह एक रंगीन और उत्साह से भरी शुरुआत होती है।

7. ऑस्ट्रेलिया: प्रकृति से जुड़ी शुरुआत

ऑस्ट्रेलियाई सुबहें अक्सर हेल्दी होती हैं। टोस्ट और एवोकाडो या ताजे फलों के साथ चाय या कॉफी लेना आम बात है। कुछ लोग सर्फिंग या सुबह की दौड़ जैसी बाहरी गतिविधियों से दिन की शुरुआत करते हैं।

8. जर्मनी: भरपेट नाश्ता और तैयारी का समय

जर्मनी में सुबह का नाश्ता खासा भरपूर होता है। ब्रेड, चीज़, ठंडी कटिंग और चाय या कॉफी के साथ लोग खुद को पूरे दिन के लिए तैयार करते हैं। यह एक संतुलित और व्यवस्थित शुरुआत है।

9. मध्य पूर्व: परंपरा और विश्वास का संगम

मध्य पूर्व में सुबह की शुरुआत चाय या अरबी कॉफी के साथ होती है। फ्लैटब्रेड, चीज़ और बीन्स जैसे नाश्ते के साथ सुबह की नमाज (फज्र) महत्वपूर्ण होती है। यह आध्यात्मिकता और परंपराओं को दर्शाता है।

10. रूस: ठंड में गर्माहट

रूस में सुबहें कड़क सर्दियों में गर्म नाश्ते से शुरू होती हैं। काशा (दलिया) और चाय का आनंद लिया जाता है। कुछ लोग सर्द मौसम में सुबह की सैर भी करते हैं, जो उनके दृढ़ और साहसी स्वभाव को दर्शाता है।

11. स्कैंडिनेविया: प्रकृति और स्वास्थ का संतुलन

स्वीडन और नॉर्वे जैसे स्कैंडिनेवियाई देशों में लोग सुबह की शुरुआत राई ब्रेड, बेरीज़ और दही जैसे हेल्दी नाश्ते से करते हैं। सर्दियों में, सुबह के समय सॉना का भी आनंद लिया जाता है, जो उन्हें दिन भर तरोताजा रखता है।

12. इटली: जल्दबाजी में स्वाद का आनंद

इटली में सुबहें अक्सर एक कप एस्प्रेसो या कैपुचिनो और पेस्ट्री के साथ बार काउंटर पर बिताई जाती हैं। यह तेज़ लेकिन स्वादिष्ट शुरुआत इटालियंस की जीवनशैली का हिस्सा है।

सुबह का जादू

हर देश की सुबह की परंपराएं उनके इतिहास, मौसम और संस्कृति से गहराई से जुड़ी होती हैं। चाहे यह भारत की प्रार्थनाओं से शुरू हो, जापान के अनुशासन से या फ्रांस की शांति से, हर सुबह जीवन को एक नया आयाम देती है।

आपकी सुबह कैसी होती है? क्या यह किसी देश की सुबह से मेल खाती है, या इसमें आपका अपना अनोखा अंदाज है? अपनी सुबह को खास बनाइए और इसे एक नई शुरुआत के रूप में अपनाइए!


Morning Stories: Unique Mornings from Around the World

Mornings are the most special time of the day. They bring new opportunities, fresh energy, and a chance to set the tone for the hours ahead. Every country has its own way of embracing the morning, reflecting its culture, traditions, and lifestyle. Let’s explore the fascinating morning routines from around the world and see how people start their day.


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1. India: A Blend of Yoga, Tea, and Spirituality

Mornings in India are often steeped in spirituality. Some start their day with temple bells and prayers, while others practice yoga and meditation to gather their energy. A warm cup of chai with a newspaper is a staple for many. In rural areas, mornings begin with tending to fields or livestock, showcasing a deep connection to nature.


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2. Japan: Simplicity and Discipline

Japanese mornings are a perfect blend of simplicity and discipline. Many people engage in "rajio taiso" (radio calisthenics) to refresh their body and mind. The day often begins with a cup of green tea and a light, nutritious breakfast. Cleanliness and order are key elements of Japanese life, even in the early hours.


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3. USA: Coffee and Digital Routines

Mornings in the United States are often fueled by caffeine. A steaming cup of coffee is the first step for many, followed by checking emails or catching up on the latest news. Fitness enthusiasts fit in a quick gym session or a brisk run before diving into their busy schedules.


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4. France: Slow and Relaxed Starts

In France, mornings are an art form. A cup of coffee paired with a buttery croissant or a fresh baguette topped with jam is the quintessential French breakfast. This leisurely routine is often enjoyed at home or at a charming café, where the focus is on savoring the moment rather than rushing through it.


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5. China: A Harmony of Nature and Health

Mornings in China are deeply rooted in tradition. Many start their day with tai chi or a gentle walk in the park, connecting with nature while rejuvenating their bodies. A typical breakfast includes congee (rice porridge) or steamed buns, offering a healthy and comforting start to the day.


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6. Mexico: Flavorful and Lively Beginnings

In Mexico, mornings are full of vibrant flavors. A spiced cup of “café de olla” (coffee infused with cinnamon) is paired with traditional dishes like tamales or chilaquiles. This hearty breakfast sets the tone for a day filled with energy and color.


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7. Australia: Outdoor Adventures and Health

Australian mornings often begin with a healthy breakfast of avocado toast or cereal accompanied by tea or coffee. Many people head outdoors for a jog, a swim, or even surfing, embracing the country’s love for nature and fitness.


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8. Germany: A Hearty and Organized Start

Germany’s mornings are all about preparation and nourishment. A typical breakfast includes fresh bread, cheese, cold cuts, and coffee or tea. The structured and fulfilling start reflects the organized lifestyle Germans are known for.


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9. Middle East: Tradition and Faith

In the Middle East, mornings start with a strong cup of tea or Arabic coffee, often accompanied by flatbread, cheese, or beans. For many, the day begins with Fajr (the pre-dawn prayer), grounding them spiritually before tackling the day ahead.


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10. Russia: Warmth in the Cold

Russian mornings are designed to combat the cold with warmth. A hot bowl of kasha (porridge) or eggs served with tea is the preferred breakfast. In colder months, some start their day with a brisk walk, highlighting their resilience and love for their surroundings.


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11. Scandinavia: Balance and Simplicity

Mornings in Scandinavia are simple yet wholesome. A typical breakfast includes rye bread, cheese, or yogurt topped with fresh berries. In the winter months, many enjoy a quick sauna session to energize themselves for the day ahead.


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12. Italy: Quick but Delightful

Italians prefer a quick yet delightful start to their day. A shot of espresso or a creamy cappuccino paired with a pastry is enjoyed standing at a café counter. It’s a short but flavorful tradition that speaks to Italy’s love for good food and coffee.


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The Magic of Mornings

Every country’s morning routine is a reflection of its culture, climate, and values. Whether it’s the spiritual calmness of India, the disciplined start in Japan, or the leisurely charm of France, mornings are a beautiful way to connect with the essence of life.

How do you start your day? Does your morning resemble any of these traditions, or is it uniquely your own? Embrace your mornings and make them as special as they are meant to be!



रुको मत बस दौड़ते रहो



यह दुनिया एक विशाल रेस ट्रैक है, जहाँ हर कोई अपनी मंज़िल की ओर भाग रहा है। कोई किसी के लिए रुकता नहीं, न ही यह देखता है कि कौन गिरा, कौन ठहरा, या कौन लड़खड़ा रहा है। हर इंसान अपनी ही मंज़िल पर ध्यान केंद्रित किए हुए है।जब हम इस दौड़ में गिरते हैं, तो हमें अपने भीतर से हिम्मत जुटानी होती है, फिर से खड़ा होना होता है, और आगे बढ़ना होता है। गिरना अंत नहीं है, यह तो हमारे साहस और दृढ़ता का इम्तिहान है।लेकिन याद रखें, हर दौड़ का एक अंत होता है। कुछ लोग आधे रास्ते में रुक जाते हैं, कुछ मंज़िल से पहले, और कुछ मंज़िल तक पहुँचकर। लेकिन अंततः हर दौड़ समाप्त होती है। असली मायने इस बात के हैं कि हमने अपनी यात्रा को कितनी हिम्मत और जुनून से पूरा किया।अपनी दौड़ को उद्देश्यपूर्ण बनाएं, और हर कदम को मायने दें।@sd This world is like a vast racetrack, where everyone is running, driven by their own goals and aspirations. No one pauses, no one looks back to see who has stumbled, who has fallen, or who is struggling to keep up. Each soul is focused on their own finish line.When we fall on this relentless track, it’s up to us to summon the courage within, to rise again, and take those first steps forward. The journey doesn’t end with a fall—it continues with resilience, strength, and determination.But remember, every race has its end. Some will halt midway, some before reaching the finish line, and others right at it. Yet, the truth remains: every race concludes. What truly matters is not how far we ran, but how courageously we faced the journey.Keep running your race with purpose, and make every step count.@SdSuneeta Dhariwal Jangid

गुरुवार, 17 मार्च 2022

सी डैक मोहाली ने मनाया महिला दिवस -लैंगिक भेदभाव पर हुई चर्चा

अंतरष्ट्रीय महिला दिवस के सप्ताह पूर्व से सप्ताह पश्चात तक आयोजनों का सिलसिला अभी थमा नही है बीते  9 मार्च को भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकस सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय  द्वारा संचालित प्रगत संगणन विकास केंद्र मोहाली (सी डैक)  द्वारा महिला दिवस मनाते हुए  महिला अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए विशेष चिंतन व जागरुकता स्त्र  का  आयोजन किया गया ।जिस में वरिष्ठ समाजिक चिंतक व प्रोत्साहक श्रीमती सुनीता धारीवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्तिथ हुई।कार्यक्रम के आरंभ में सी डैक मोहाली के कार्यकारी निदेशक डॉ प्रवीण कुमार खोसला ने सभी को महिला दिवस की बधाई दी और कहा कि आज हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है ।और अब तो शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा हो जहां महिलाओं ने अपना दमखम नही दिखाया है ।प्रवीण खोसला ने एक और महत्वपूर्ण बात कही कि  उच्च प्रशासनिक स्तर के निर्णयों में महिला अधिकारी  हमें  उस दृष्टिकोण से परिचित करवाती हैं जिस के बारे में अधिकतर पुरुष या तो अनभिज्ञ होते हैं या अधिक मान्यता नही देते हैं । निर्णय लेने की भूमिका में महिला अधिकारियोँ की भागीदारी फैसलों को अधिक मानवीय बनाती है ।
भारत मे  इलेक्ट्रॉनिक्स ,सूचना प्रद्योगिकी एवं विज्ञान के सभी क्षेत्रों में महिलाओं की सँख्या उत्साहजनक है ।उन्होंने मुख्य अतिथि  श्रीमती सुनीता धारीवाल का औपचरिक अभिनन्दन कर वक्तव्य के लिए आमंत्रित किया ।
सुनीता धारीवाल ने अपने वक्तव्य में कहा भारतीय महिलाओं ने तमाम विश्व की महिलाओं की तुलना बहुत कम समय में समाज मे अपनी जगह बनाई है ।आज का दौर महिलाओं के लिए उत्सव का दौर है जिस में हम चारों तरफ महिलाओं की उप्लब्धियों का जश्न मनाते हुए आगे बढ़ रहे हैं ।परंतु महिलाओं के सामने आज भी चुनौतियां है समाज की अनेक तहों में अनेक प्रकार की समस्याओं से आज भी महिलाएं जूझ रही है ।शिक्षा और स्वास्थ्य अभी भी अपने लक्ष्य नही छू पाया है ।महिलाओं के प्रति समाज की मानसिकता में परिवर्तन तो आया है पर एक वर्ग तक ही सीमित है जिस में शिक्षा के कारण सोच बदली है  महिलाओं के प्रति सदियों से चली आ रही धारणाओं में बदलाव जरूर आया है महिलाओं की स्वीकार्यता भी  बढ़ी है । गैंगरेप ,घरेलूं हिंसा ,यौन उत्पीड़न ,मानव तस्करी के  मामलों में ज्यादा कमी नजर नही आती है ।
महिलाओं को अवसर देने के लिए अनुकूल सामाजिक माहौल बनाने की भी जरूरत होती है।यह सबकी सामाजिक जिम्मेदारी है ।और हर किसी को जागरुक होने की जरूरत होगी ।आर्थिक और राजनैतिक नेतृत्व की दिशा में अभी अनेक खाइयों को लांघना बाकी है ।
कार्यक्रम में सी डैक की महिला अधिकारी उपस्थित रहीं और उन्होंने ने भी अपने विचार साँझे किये ।

शुक्रवार, 11 मार्च 2022

अंकित धारीवाल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा  महिलाओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ने और उन्हें सूचना एवं प्रसारण के क्षेत्र में सबल बनाने हेतु चलाई जा रही वीमेन टीवी इंडिया नेटवर्क परियोजना के बैनर तले  स्नातकोत्तर महिला  राजकीय महाविद्यालय सेक्टर 11 चंडीगढ ,राजकीय स्नातक शिक्षा महाविद्यालय सेक्टर 20 चंडीगढ़ ,एवम यूनिवर्सिटी कालेज चुन्नी कलां ,फतेहगढ़ साहिब पंजाब के सहयोग से अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्रीय परिचर्चा का ऑनलाइन आयोजन किया गया जिस में लैंगिक समानता की जरूरत विषय पर अनुभवी वक्ताओं ने अपने विचार सांझा किये  ।इस कार्यक्रम में हरियाणा के पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजबीर देसवाल आईपीएस ने मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए एवम वरिष्ठ शिक्षविद प्रोफेसर डॉ अनिता कौशल विशिष्ठ अतिथि के तौर पर शामिल हुई और प्रतिभगियों का हौंसला बढ़ाया ।कार्यक्रम की शुरुआत में वीमेन टीवी इंडिया वेब पोर्टल की एडिटर मीनाक्षी चौधरी ने वीमेन टीवी  परियोजना के उद्देश्यों के  बारे में बताया । अंकित धारीवाल मेमोरियल ट्रस्ट की अध्यक्षा विभाति पढियारी ने मुख्य अतिथि ,विशिष्ठ अतिथी , प्रतिभगियों ,वक्ताओं,सहयोगी शिक्षण संस्थानों  और श्रोताओं का  औपचारिक अभिनन्दन किया और ट्रस्ट द्वारा चलाई जा रही परियोजनाओं के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि "मंगला"  किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम, "बाल सखा "बाल यौन उत्पीड़न की रोकथाम के प्रति जागरुक्ता कार्यक्रम , " वर्कप्लेस यूफोरिया "कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए जागरुकता एवम  शिकायत निवारण समितियों के गठन और क्षमता वर्धन हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम ,और वीमेन टीवी इंडिया नेटवर्क परियोजना के अंतर्गत महिलाओ को डिजिटल दुनिया से जोड़ कर उन्हें डिजिटल शिक्षित किया जा रहा है व उनकी क्षमताओं को प्रशिक्षण द्वारा बढ़ाया जा रहा है ।यह डिजिटल स्थान महिलाओं को अपनी आवाज उठाने और प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर देता है जिसका उद्देश्य सही और जिम्मेदार  सूचना का प्रसारण करना है ।
इसके बाद कार्यक्रम के संचालन की बागडोर वीमेन टीवी इंडिया नेटवर्क से जुड़ी प्रतिभशाली काउंसलर विनीत दुआ ने संभाली और परिचर्चा का बड़ी खूबसूरती और प्रभावशाली ढंग से संचालन किया ।
सबसे पहले हैदराबाद निवासी कॉर्पोरेट ट्रेनर प्रेमसाई समन्त्राय ने अपने विचार रखे और बताया कि आने वाला समाज लिंग भेद को खत्म कर समानता पर लाना है तो हमें उसकी तैयारी करनी होगी ।स्त्री पुरुष व मिश्रित व अलिंगी नागरिकों के लिए किस तरह  से नए शब्दों को गढ़ने की जरूरत होगी और किस तरह नई भौतिक सुविधाओं की जरूरत पड़ेगी ।हमे धीरे धीरे इन सब में भी परिवर्तन लाने होंगे ।
इसके बाद सुप्रसिद्ध लेखक ,प्रबन्धन विशेषज्ञ  कर्नल 
दलजीत चीमा ने अपने विचार रखे ।

अगली वक्ता वरिष्ठ पत्रकार रेणु सूद सिन्हा ने अपने विचार रखते हुए  कहा कि 

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ अनिता कौशल ने अपने संबोधन में अभिव्यक्त किया कि 

 इसके बाद परिचर्चा का दौर शुरू हुआ जिसे विनीत दुआ ने सहयोगी कालेज की एन एस एस इंचार्ज प्रोफेसर  ने भाग लिया ।एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रवनीत चावला  ,यूनिवर्सिटी कालेज की एन एस एस इंचार्ज असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉ गीत लांबा और वीमेन टीवी इंडिया की निदेशक पूर्व प्रोफेसर  रजनी भल्ला ने भी परिचर्चा में भाग ले कर चर्चा को सार्थकता प्रदान की ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  पुलिस प्रशासनिक अधिकारी   राजबीर देसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि ...
लगभग दो घण्टे चले इस कार्यक्रम में  मुख्य अतिथि राजबीर देसवाल ने चर्चा में सक्रियता बनाये रखी और सभी को ध्यान से सुना और त्वरित  टिप्पणी से कार्यक्रम को जीवंत बनाये रखा ।
इस कार्यक्रम के आयोजन में पी जी जी जी सी सेक्टर 11 चंडीगढ की जेंडर कमेटी की इन्चार्ज डॉ कमल प्रीत ने भी लगातार  सहयोग दिया ।और छात्राओं को इस आयोजन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया ।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए वीमेन टीवी से जुड़ी सदस्य महिलाओं ने सहयोग किया और कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज करवाई ।तीनो सहयोगी कालेज के छात्रों के अतिरिक्त वीमेन टीवी टीम के सदस्य डॉ मंजू अरोड़ा ,जसपाल कौर ,शशि कालिया ,नंदिनी , अस्तिन्दर कौर ,स्नेह विज ,उर्मिल बजाज ,एवम अन्य सदस्यों ने भाग लिया ।

शनिवार, 29 जनवरी 2022

पंजाब प्रदेश की लोक गायिका श्रीमती गुरमीत बावा को मरणोपरांत पदम श्री से नवाजा गया है गुरमीत बावा को लम्बी हेक की मलिका के रूप में प्रसिद्धि मिली







भारत के पंजाब प्रदेश की लोक गायिका श्रीमती गुरमीत बावा को मरणोपरांत पदम श्री से नवाजा गया है गुरमीत बावा को लम्बी हेक की मलिका के रूप में प्रसिद्धि मिली ।वे लगभग 45 सेकंड तक लम्बा आलाप ले कर अपने गायन की शुरुआत करती थी उनका यही अंदाज उन्हें अपने समकालीन गायकों से अलग करता था । उनका ठेठ देसी पंजाबी लहजा और पारम्परिक अंदाज में गायकी ने लोगों को दशकों तक दीवाना बनाये रखा ।
गुरमीत बावा दूरदर्शन पर गाने वाली पहली गायिका बनी थी । जब गुरमीत बावा की मां का देहांत हुआ तब वे मात्र 2 वर्ष की थी पढ़ाई लिखाई के संकल्प ने उन्हें उस क्षेत्र की पहली टीचर होने का गौरव दिलाया ।जब लड़कियों की स्कूली शिक्षा प्रचलन ने नही तब गुरमीत ने जूनियर बेसिक टीचर की पढ़ाई कर ली थी ।
वे शौकिया गाती थी और बाद में व्यवसायिक गायिका बनी ।वे  तुम्बी  ,चिमटा ढोलकी , अल्गोजा जैसे पारंपरिक वाद्यों से संगत कर गाती थी ।उनके इस लोक रंग में  गाने के अंदाज ने न केवल लोक साजों को अंतरराष्ट्रीय मिली बल्कि भारतीय महिलाओं को भी पहचान मिली ।रूस ,लीबिया ,बैंकाक,थाईलैंड ,जापान सहित अनेक देशों में उन्होंने लोक गीत गाये और भारत की  लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया ।
उन्हें पूर्व में पंजाब सरकार  राज्य पुरस्कार ,शिरोमणि गायिका ,संगीत नाटक अकादमी द्वारा राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है इस बार पदम् श्री पुरस्कार दिया गया है ।
फरवरी 18 1944 में गुरमीत बावा का जन्म अविभाजित भारत के गांव कोठे जिला गुरदासपुर में हुआ था  पिछले वर्ष 21 नवम्बर 2021  को अमृतसर में देहांत हुआ । बीते दिनों उनके परिवार के सदस्यों ने सरकार द्वारा गुरमीत बावा की अनदेखी की बात सोशल मीडिया साक्षात्कारों में भी उठाई थी और पदम् श्री दिए जाने की मांग की थी । उन्हें  रोष  था ऐसी कलाकार जिस ने सारी उम्र लोक विरासत को सहेजने और सवांरने में लगाई हो सरकार द्वारा उन्हें  पदम् पुरस्कारों लायक नही समझा गया ।
पर अब जब उन्हें यह पुरस्कार दिया जाना है तो वह इस दुनिया मे नही हैं ।
 गुरमीत बावा को बधाई वे जहां है वहां तक यह सलाम पँहुचे ।

शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

भारत मे अवैध संबंध के कारण तलाक इतने नही हुए होंगे जितनी हत्याएं और आत्म हत्याएं होती है ।क्यों लोग भटक जाते हैं क्यों पनप जाते है अवैध रिश्ते और क्या होता है असर कैसे समझें इस समस्या को ?


 महिलाओं के एक स्थानीय क्लब ने अभी कुछ रोज पहले मुझे अपनी वार्षिक बैठक की अध्यक्षता करने के लिए बुलाया।बढ़िया कार्यक्रम था मेरा बहुत मान सम्मान किया - हर बार की तरह अपने उद्बोधन में मैंने महिलाओं से कहा कि कोई ऐसी बात जो आप किसी से न कह पाई हों आप मुझ से निसंकोच अकेले में कह सकती हैं।हो सकता है मैं आपकी  समस्या का कोई हल बता पाऊं और अधिक से अधिक यह होगा कि आपका मन हल्का होगा और गोपनीयता भी बनी रहेगी ।
कोई भी स्त्री मेरे पास नही आई सब बोली कि वे खुश हैं उन्हें कोई समस्या नही है चलो जी कार्यक्रम खत्म हुआ और सब चल दी मैं अपनी गाड़ी की तरफ गई और गाड़ी में बैठने लगी तो पीछे से आवाज आई दीदी रुको एक मिनट ।मैंने गाड़ी का शीशा खोला और उसकी तरफ देखा उस ने अपनी शॉल उतार दी और बोली दीदी मुझे ध्यान से देखो वह घूम गई । दीदी मुझे  सर से पांव तक देखो और मुझ में बताओ मुझ में क्या कमी है मैं एम ए पास हूँ दो बेटे हैं मेरे ।लम्बे बाल है मेरे रंग भी गोरा है आप बताओ मुझ में कमी क्या है ।मेरे लिए प्रश्न अप्रत्याशित था ।मैने कहा तुम तो बहुत सुंदर हो शुशील हो ।उस ने मेरी बात सुनते ही कहा -अच्छा दीदी आप बताओ कि यदि मैं सुंदर भी हूँ सब ठीक ठाक भी है तो मेरा पति दूसरी औरत के पास क्यों जाता है अब उसकी आवाज में कम्पन था गला रुंध गया उसका और बताने लगी कि मैं बड़े व्यापारिक परिवार से आई हूं दान दहेज सब बढ़ चढ़ कर लाई थी बिल्कुल स्वस्थ हूँ  मैं पर उसको नही रोक पाई हूँ।मेरी बुध्दि अब काम ही नही करती ।इस सवाल का कोई छोटा सा जवाब नही बनता था ।मैं उसे इतना कह पाई कि धैर्य रखो और अगला शब्द यह निकला कि तुम सर्वक्षेष्ठ यह तुम्हे पता है पर तुम ने खुद को वही मान लिया जो तुम्हारा मनोबल गिराने के लिये तुम से कहा गया है ।वह सब आज से डिलीट खुद को देखना शुरू वह तुम्हे देखेगा ।और अगली मुलाकात का वादा कर मैं चली आई क्योंकि  हमारी वजहँ से  ट्रैफिक रुक रहा था  बाकी महिलाओ ने भी अपनी गाड़ियां निकालनी थी ।उस दिन मैने उस औरत की आखो में तिरस्कार कर दिए जाने बाद रूह में बस जाने वाली  गजब की पीड़ा का एहसास किया ।रास्ते भर सोचती आई थी कि मुश्किल बहुत है रिजेक्शन को बर्दाश्त करना कि तुम मेरे लायक नही हो ।आज फिर नया केस आया तो सोचा इस पर भी लिखा  ही जाए ।
आये दिन हम ऐसे अनेक लेख आलेख  पढ़ते है  वीडियो देखते है पॉडकास्ट  सुनते है विवाहेतर सम्बन्ध क्या है ?  क्यों है ? पति को कैसे वश में रखें ? कैसे पति को रिझायें ?  कैसे कपड़े पहनें ? क्या रात को करें ? क्या दिन में करें? बिस्तर पर क्या व्यवहार करें ? क्या करें कि पति आपकी ओर आकर्षित ही रहे ?  आप ऐसा करें ? या  आप वैसा करें ऐसे कितने ही ऐसे लेख हम सब के सामने अक्सर आते रहते  है ।कभी हम पढ़ लेते है कभी नजर अंदाज करते हैं किसी का टाइटल इतना आकर्षक होता है लेख के  भीतर कुछ भी नही ।ऐसे लेख छप इस लिए रहें है कि समाज मे यह समस्या तो है  जिस पर बात की ही नही जाती है आपसी सम्बन्धो में  अनेक ऐसे मामले हैं जो थोड़ी सी समझदारी से हल किये जा सकते थे ।पर समय रहते उस विषय पर समझ पैदा करने वाला कोई नही था । किसी अच्छे काउंसलर  की सलाह लेना मंहगा भी है और सब की पंहुच में भी नही है । समस्या जिन्हें है वह उन से बात कर रहे होते हैं जो उनके आस पास उपलब्ध है जरूरी नही कि समस्या सुनने वाले मित्र या परिजन इतने परिपक्व या अनुभवी हों कि कोई राय दे सकें ।अक्सर हल निकल नही पाया । 

   मैं भी  इस विषय पर अपना  दृष्टिकोण सांझा करूँ ।
विवाहेतर सम्बन्ध का अर्थ है विवाह के बाद किसी अन्य स्त्री या पुरुष से बनाये गए सम्बन्ध और अधिकतर इसका आशय  अन्य स्त्री या पुरुष से बनाये गए शारीरिक संबंधों के संदर्भ में ही लिया जाता है ।
आज हम इस विषय पर  विस्तार से चर्चा कर लेते हैं समझने की कोशिश करते है ।सब से पहले हम सब को यह जानना है मनुष्य की मानव की हम इंसानो की प्रकृति क्या है ? दरअसल मनुष्य जैविक रूप से ही किसी एक साथी के साथ रहने के लिए बना ही नही है मनुष्य अपने जीवन मे अनेकानेक स्त्री पुरषों सम लिंगियों उभय लिंगियों से सम्बन्ध बनाता है ।आप यदि प्रकृति को करीब से समझे तो पूरी सृष्टि में केवल पक्षी ही हैं जो 90 प्रतिशत एक साथी संग रहते जीते और मरते हैं स्तनपायी जीवों में यह व्यवहार नही मिलता है  6500 स्तनपायी जीवों की प्रजातियों में खुले सम्बन्ध ही होते है ।मनुष्य के जैविक इतिहास में मनुष्य एक साथी रखने वाला प्राणी नही है । यह उसकी प्रकृति ही नही है ।विकास के क्रम में मनुष्यो ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए अन्य जीवों पर अपनी सत्ता बनाने और बनाए रखने के लिए  समाज बनाया । एकल की ताकत और झुंड की ताकत में फर्क होता है और सत्ता जैविक है जो बलशाली है वही जीवित है । मनुष्यो का एक झुंड समूहिक नियंत्रण में रह कर अपना सार्थक  विकास करता रहे इसके लिए समाज ने नियंत्रण के नियम बनाये और लागू किये ।सब कबीलों के अपने नियम कायदे कानून ।यौन व्यवहार पर नियंत्रण के लिए भी कानून बनाये ।हर कबीले के लोगो का यौनिक व्यवहार और उसके नियम अलग अलग मिलेंगे ।कहीं पर किसी तरह के व्यवहार को मान्यता मिली हुई होगी ।कहीं पर वर्जित होगा ।एक बात तय है कि हर नियम कबीले के ताकतवर के पलड़े में झुका हुआ मिलेगा ।बहु पति व्यवस्था ,बहु पत्नी व्यवस्था ,रिश्ते नातों में भी किस किस से सम्बन्ध जायज किस से नाजायज कहलाये जाएंगे सब समाज की देन है ।प्रकृति को तो अपना च्रक निर्बाध चलाने के लिए एक नर और एक मादा की ही जरूरत है और उनके बीच दैहिक संबंध बनवाने के लिए दिमाग मे रसायन के स्त्राव का प्रबंध भी दे कर भेजा गया है जिस दौरान वह रसायन रिसता है तो बुध्दि जड़ रहती है ।प्रकृति का एक मात्र लक्ष्य है प्रजनन वह उस व्यवस्था में आज तक खरी है ।
चलिए आगे बढ़ते हैं अब आते है विवाह पर ।यौन व्यवहार पर  नियंत्रण और प्रजनन सुनिशिचत हो सके और इस से होने वाली संतान की भरण पोषण की जिम्मेदारी किसी के कंधे पर डालने के लिए विवाह की व्यवस्था का निर्माण हुआ ।इसी जिम्मेदारी के निर्वहन हेतु पितृ सत्ता और मातृ सत्ता व्यवस्था का  निर्माण हुआ ।अगर सारी पूंजी सम्पति साधन संसाधन का मालिकाना हक स्त्री के पास हो तो उस कबीले में हर बच्चे के भरण पोषण की जिम्मेदारी स्त्री की ।और यदि बच्चों का भरण पोषण पुरुष की जिम्मेदारी तो सारा धन साधन संसाधन पर अधिकार पुरुष का ।
सत्ता या व्यवस्था कोई भी सब के केंद्र में रहा बच्चों का भरण पोषण ।यदि सन्तान न हुई यदि सन्तान न बची तो सब खत्म ।इतिहास कथा कहानी सभ्यता सब खत्म 
। प्रजनन करना है नई  पीढ़ी को बनाना भी है  बचाना भी  है । विकास के क्रम में ही ईश्वर की अवधरणा पुख्ता हुई धर्म आस्था यह सब निर्माण हुआ और इंसान को केवल और केवल  ईश्वर से डर लगा  क्योंकि उस की नजर उस से ज्यादा ताकतवर वही था । और समाज ने इसी कमजोरी को पकड़ते हुए विवाह के नियम में  ईश्वर को साक्षी रख लिया ताकि यह व्यवस्था बनी रहे और यौनिक नियंत्रण सधा रहे इस नियंत्रण को साधने से अनेक उत्पात नियंत्रण में आ गए ।बहुत कुछ सध गया ।यह अकाट्य फार्मूला सिद्ध हुआ जो प्राकृतिक रूप से स्वतन्त्र जीव पर नकेल कसने में कामयाब हुआ और परिवार कुटुम महत्वपूर्ण बन गए ।समाज मे आश्चर्यजनक नियंत्रित सामाजिक  व्यवस्था बन गई और कबीले संस्कृतियां फलने फूलने लगी ।अपवाद में जो भी घटित होता गया उसी के अनुसार नियम बनते चले गए ।
अब 2022 है विश्व भर  के मानव  कबीले  इतना लंबा कई सौ  हजारो वर्षो का सफर कर चुके है ।गगन चुम्बी इमारतों के  भौतिक विकास से होते हुए मंगल पर जाने के वाहन भी बन गए और चले भी गए ।ये अलग बात है कि हमारा चन्द्रयान तो भटक कर  किसी खड्डे में पड़ गया और हमें कभी कोई  नासा  पड़ोसी बताता है कभी कोई बताता है कि जी आपका बालक यहां देखा है कोई कहता है वहां है पर हमारा वाहन न मिला ।अब तो हम नया बनाएंगे तमाम दुनिया मे सब से  सस्ते में  बनायेनंगे और इस बार  रास्ते पर ज्यादा नजर रखेंगे हम और इस बार तो  यात्रा का उद्घटान तो बिल्कुल  नही करवाएंगे किसी से भी चाहे प्रधन्मन्त्री ही क्यों न हो ) 
जिस विषय पर लेख चल रहा  है वह भी चंद्रयान की तरह भटक सकता है तो चलो पुनः लौटते है विवाहेत्तर सम्बन्धो की ओर । हम वर्तमान संदर्भ में इस लेख को आगे बढाते हैं ।


भारत मे समाज अब तेजी से बदल रहा है खास तौर पर वैवाहिक मान्यताएं और सामाजिक व्यवस्थाएं बदल रही हैं आज से मात्र दस वर्ष पूर्व भी अधिकतर भारतीयों ने "ओपन मैरिज" नामक चिड़िया का नाम भी नही सुना होगा .पर आज प्रचलन में है विवाहित स्त्री पुरुष आपस मे भी सम्बन्ध बना लें और पति अपनी मर्जी से पति अपनी मर्जी से  चाहे कहीं भी सम्बन्ध बना लें पर साथ साथ बने भी रहें ।यह बात मैं अपनी सास को बता दूं तो उसको तो पसीने आ जाएंगे ।वे हक्की बक्की रह जाएगी मुँह खुला का खुला रह जायेगा ।कहेगी हे राम पढ़ाई लिखाई इसे इसे काम सिखावे या तो कोई काम की पढ़ाई ना हुई ।
अब मैं उन वैवाहिक जोड़ो की ओर मुखातिब होती हूँ जो केवल विवाह हेतर सम्बन्धो के कारण  तलाक की दहलीज पर खड़े  है । और अबोध  बच्चे न उस घर के   अंदर हैं न बाहर न ही उन्हें दहलीज का ही पता है ।
हालांकि तलाक के मामलों में केवल विवाह हेतर संबध ही एक अकेला कारण नही है आपसी हिंसा ,कमाई का न होना , व्यसन  ,व्याधि,  सन्तान का न होना ,सेक्स का न होना एवं  अन्य भी  छोटे बड़े  कारण है  जो दो विवाहितो को अलग करते हैं ।

लोग विवाह के बाद भी दूसरे के प्रति आकर्षित क्यों हो जाते हैं ? 
मनुष्य स्वभाव और प्रकृति से एक साथी से सम्बन्ध रखने वाला प्राणी नही है ।वह बार बार आकर्षित होगा बस उसे फुरसत और इसके लिए  उचित परिस्थितियां मिलेंगी तो यह प्रयोग कर ही लेगा ।कभी नही चूकेगा ।(अपवाद यहां भी हैं )
व्यक्ति हर उस चीज की ओर आकर्षित होता है जो उसकी पंहुच से बाहर हो और अगर कभी उस से पंहुच से बाहर की चीज स्वयं चल कर आ जाए तो पौ बारह है ही  । किसी नए साथी से मिलने वाली अटेंशन में रोमांच है यह नितांत नया अनुभव होगा ।नई नजदीकी नई गन्ध का अनुभव होगा दिमाग मे एंडोर्फिन लेवल बढेगा और वही नशा बार बार ट्रिगर करेगा । आनन्द की अनुभूति तो  होती ही  है ।आप को कोई चाहने लगता है तो स्वयं पर विश्वास बढ़ने लगता है ।यह तो अपेक्षित ही है कि अगर किसी नए व्यक्ति के संपर्क में  आ जाये और यदि  वह व्यक्ति  उस का प्रसंशक भी  है तो वह प्रतिदिन या दिन में बीस बार प्रसशा के शब्द सुनने की लज्जत हासिल करेगा  ।  प्रसंशा से प्रसन्नता अतीव होगी ।आप डिमांड में हो यह भी भावना को बल मिलेगा ।
हम सब मनुष्य  सदैव दुसरो के गुणों से,  उनकी योग्यता से, उनकी लुक्स से , उपलब्धियों से ,ताकत से , प्रतिष्ठा से ,बुद्धि से ,अनुभव से  प्रभावित होते ही रहते है  और तो क्या ही कहें हम  मनुष्य तो किसी की एक छोटी सी अदा पर पर आकर्षित हो सकते है आकर्षण नितांत सहज और  जैविक है  आकर्षण के बाद का निकट सानिध्य और सहवास  बुध्दि की ही उपज है ।आकर्षण से हासिल हुई नजदीकी से बुध्दि संभावना खोजने निकल लेगी कि यहां पर इस से इतर भी कुछ अनुभव की गुंजाइश हो सकती है ।इस स्तर पर पुरुष की आतुरता तो देखते ही बनती है (कुछ  पुरषों को अपवाद में भी रख लेना चाहिए जिनकी बुद्धि में ब्रेक भी होते हैं  )
हम सब मे कोई न कोई  गुण प्रसंशनीय होता है किसी मे कोई गुण है किसी मे कोई  ।तो हमें वही व्यक्ति आकर्षक लगेंगे जैसे की हमें खोज होती है ।और यह खोज अवचेतन में होती है ।इसलिए आकर्षण कटघरे में नही पर उस के आगे कितना नियंत्रण किया गया ,या नियंत्रण सोचा नही गया वह कृत्य  कटघरे में लाएगा ।

और आप को याद करवा दूँ पितृ सत्ता समाज मे आज भी यह विचार उतना ही पुख्ता है आकर्षित हो कर आने वाली स्त्री के साथ बिना सहवास किये जाने देंने का मतलब मर्दानगी पर लानत है इसलिए वह उस स्तिथि तक लाने के लिए प्रपंच रच लेता है ।फर्क अब इतना आया है समाज मे।  कि अब यही सोच स्त्रियों के पास भी ट्रांसफर हो गई है कि यदि आकर्षित हो कर  कोई पुरुष आ ही गया था तो बिना कपड़े उतरवाए जाने कैसे दिया । इसलिए बराबरी दोनो तरफ हो रही है और आगे आगे और भी बदल जायेगा ।और अब तो इस तरह का ट्रैप लगाना  व्यवसाय बन गया है ।हालांकि यह फंदे यानी ट्रैप भी सदियों पुराने है पर कारगार आज भी हैं ।अंततः हनी ट्रैप का शहद बाद में कड़वे ही निकलेंगे ।
किसी पर टपक जाए उस को ले बैठेंगे चाहे विवाह हो,परिवार हो व्यापार हो या सत्ता ।
इसी आकषर्ण को बनाये रखने के लिये तो श्रृंगार ,वेश भूषा ,सुगन्धों का ईजाद हुआ यह न होता तो आज भी बिना पत्तों के या सब एक जैसे पत्तों से लिपटे  बालों की जटाएं बढाये हुए यूँ ही घूम रहे होते ।ये शिनैल नाम के पर्फ्यूम की खोज हुई ही न होती ।
सदा आकर्षक बने रहने के लिए इतना बड़ा बाजार है सदियो से  बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता रहा है कि कैसे सदा आकर्षक रहें ।जो इधर उधर साइटों पर आप लेख आप पढ़ते हो ना कि पति को  या पत्नी को कैसे काबू में रखा जाए वह यही अदाएं ही  सिखाते है ।यह नीम हकीम खतरा ए जान है क्योंकि हर मनुष्य अलग है अलग संस्कृति मूल्यों में बड़ा होता है इसलिए इस लेखों और वीडियो में बताए जा रहे  पति को न्यूड हो कर सरप्राइज देने का उपाय यहां नही चलता बल्कि उल्टे  दो थप्पड़ पड़ सकते हैं ।
हमारे पूर्वजो को   इस आकर्षण के सिद्धान्त का पता था इसलिए वह चरित्र निर्माण पर बल देते थे यानी स्व  नियंत्रण पर बल देते थे ।ताकि मैन मेड या वीमेन मेड विपदाओं से बचा जा सके ।
आगे बढ़ते हैं 
रिश्ते में विश्वास घात होता है तो क्या होता है ?

जिस समाज मे काम काम जो छुप कर किया जाए वह उस समाज अनुरूप  निसन्देह गलत है ।गलत को तो उ छुपाने के झूठ बोला जाएगा ।और झूठ को स्थापित करने के लिए झूठ बार बार बोला जाएगा ।झूठ पकड़ा भी जाएगा ।आपसी बातचीत में तल्खी आएगी ।आपसी  कड़वाहट,शारीरिक व शब्दिक  हिंसा ,आरोप प्रत्यारोप होगा एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया जाएगा ।असुरक्षा होगी ।अवसाद ,ग्लानि ,सब चले जायेंगे ।मानसिक पीड़ा होगी ।ठुकरा दिए जाने का एहसास बहुत पीड़ा दायक होगा ।क्रोध होगा बच्चों पर यह क्रोध उड़ेल दिया जाएगा ।अहं को चोट पंहुचेगी ।स्वाभिमान गिर जाएगा । असुरक्षा होगी ।घर टूटने की चिंता ।सर से छत निकल जाने की चिंता  ।खुद के और बच्चों की रोटी पढाई लिखाई सब की चिंता ।समाज के ताने,  उलाहने उपहास की चिंता ।हर तरह की असुरक्षा और भी उग्र और हिसंक बना देगी माहौल को ।एक रिस्ते के खत्म होने का  मनोबैज्ञानिक ,दंड भी होता है ,आर्थिक दंड भी होता है और सामाजिक दंड भी होता है ,यह व्यवस्था सामाजिक है समाज द्वारा पुरस्कृत और  स्वीकृत है इसलिए समाज का दबाव भी आएगा ही ।हमारा कानून भी सहजता से विवाह को टूटने नही देना चाहता ।

 रोमांचक खेलो में एक चेतावनी लगी होती है "  आप की जान का खतरा हो सकता  है " वहां पर तो केवल आप की जान जाएगी पर इस इंफीडिलिटी नामक  रोमांचक खेल में  में तो पूरे परिवार का जीवन भर का रोमांच खत्म जाएगा  और कई बार तो साथी दुनिया से ही  चला जाता है  और वह भी बच्चों सहित ।इसलिए यह बहुत खतरनाक है इस मे धैर्य और संयम ही काम आएगा ।
जितना बच सके तो बच लें ।


कैसे पता करें कि साथी चीटिंग कर रहा है?
यह पता लगाना कि साथी धोखा दे  कर रहा है तो बड़ा आसान  है  और थोड़ा मुश्किल भी ।
दो तरह के धोखेबाज होते है एक तो  धोखे देने में एक दम पारंगत और एक होते है साधारण से धोखेबाज 
साधारण की कैटेगरी में वह है जो कहीं आकर्षित हुए या कर लिए गए पर वे भावनाओं में बह गए और आगे बढ़ते चले गए कुछ सोच ही पाए । धीरे धीरे इतनी दूर निकल गए कि लौटने की सुध ही न रही ।वे तब तक बहते जाते है जब तक नया साथी उन्हें जमीन न दिखा दे ।
हर लहर का  एक समय होता है वह पूरे जोर से ऊपर उठती है और अंततः नीचे की ओर आती है ऊपर की ओर जाते हुए तो सब ऊपर ही ऊपर दिखता है  नए सपने नये आकाश नया जीवन ,सब रंगीन दिखता है और जब लहर लौटती है तो धरती भी दिखने लगती है और किनारे भी दिखते हैं और तल की गहराई भी दिखती है ।
तब परिवार छोड़ दिये बच्चे रस्म रिवाज सब दिखते हैं ।पर लौट आने का साहस नही जुटा पाते ।

नए नए प्रेम में पड़े व्यक्ति को हर कोई उसकी आंख से पहचान लेता है ।
1 वह आंखे चुराने लगता है 
2 झूठ बोलने लगता है 
3 व्यवहार में परिवर्तन आता है 
4 वह अधिक प्यार से पेश आने लगता है अपने स्वभाव के विपरीत 
5 या वह बहुत बेरुखी से पेश आता है 
6 अपनी निजी वस्तुएं लॉक में रखना लगता है 
7 फोन और सभी गैजेट्स पर लॉक लगा दिए जाते हैं 
8  किसी से फोन पर बात करने का लहजा बदला हुआ मिलता है 
9 किसी खास निश्चित वक्त पर बेचैनी होना ।रेस्टलेस हो जाता है 
10 बात बात पर  गुस्सा होना । चिड़चिड़ा पन प्रकट होना ।
11 तैयार होने में वक्त लगाना सोच कर पहनने लगना 
लुक्स पर ज्यादा ध्यान देना 
12 घर मे  मन नही लगना 
13 साथी से दूरी बनाना ।दूरी बनाने के बहाने बनाना 
14 बिना बताए घर से निकल जाना 
15 बाहर वक्त ज्यादा बिताना 
14 यात्राओं का बढ़ना 
15 खाने की आदतों का बदलना 
16 बातचीत का लहजा बदल जाना 
17 बोली में नए शब्दो का नए लहजो का प्रयोग बढ़ जाना 
18  जगह की पसंदगी  में बदलाव आ जाना 
20 संगीत की पसंद में बदलाव आना 

क्योंकि जब कोई व्यक्ति किसी के प्रेम आकर्षण में होता है तो वह अनजाने में वह सब आदते रुचियां अपने अंदर उतारने की कोशिश करता है जो उस के नए साथी को पसंद होता है ।यहां तक अनेक बार उठने बैठने के तरीके में भी बदलाव आ जाता है यह सब बदलाव अस्थायी होते है सिर्फ मादा को लुभाने के लिए जाने वाले करतब है जो हासिल हो जाने पर गायब हो जाते है और इंसान अपनी मूल प्रकृति में लौट आता है  ।धरती के सभी नर ।मादा को लुभाने के लिए कोई  झुंडों में जोर आजमाइश करता है कोई लड़ता है कोई नाचता है कोई पंख फैलाता है कोई चक्कर काटता है कोई सर नीचे टांगे ऊपर कर के करतब करता है कोई सींग चमकाने लगता है कोई कुछ करता है कोई कुछ पर सबका उद्देश्य एक ही है मादा से संसर्ग ।
ये जो नए नए परफ्यूम ट्राई किये जाते हैं नई नई कार सवारी यह सब  लुभाने वाले करतबों के आधुनिक रूप है ।
अब बात करते है दूसरी श्रेणी के मर्दो की जो घोर शातिर है उनकी पत्नियों को ताउम्र शक भी नही होता कि वे बाहर क्या कर रहे है ।वे ऐसी कोई हरकत नही करते जिस से वे पकड़े जा सकें ।वे परिवार और बच्चों की नजर में आदर्श पति और आदर्श पिता के रूप में स्थापित रहते है  कभी कोई लड़की आरोप लगा भी दे तो सारा परिवार कसमें खाता है उनकी और आरोप लगाने वाली को ही कटघरे में खड़ा करती है पत्नियां 
यानी पत्नियां उन पर छोड़ दी जाती है कि जाओ भिड़ लो इन से यह तुम्हारे सुहाग के लिए खतरा बन कर आई है।ये मर्द बुध्दि का आला इस्तेमाल करते है और सब व्यवस्थित रखते हैं ।इनके जीवन मे कितनी महिलाएं आई गई इनको भी याद नही होगा ।कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने अन्य महिला मित्रो को भी कभी निराश नही किया और वे भी  अपने अपने क्षेत्र में स्थापित कर दी गई भनक भी न लगी ।

और कुछ ऐसे है जो शातिर थे और उनको एक ही शातिर महिला ने जेल की हवा खिला दी ।ज्यादतर मर्डर एक दूसरे को धमकाने और बर्बाद कर देने वाले  
मैं अपने सामाजिक अनुभव के दावे से कह सकती हूं कि भारत मे  अवैध संबंधों के चलते  इतने तलाक नही हुए है जितने मर्डर हुए हैं । आज हम यदि यह रिसर्च करेंगे तो मर्डर का प्रतिशत ज्यादा होगा तलाक का कम 
और यदि मर्डर और आत्म हत्या दोनो को शामिल कर लेंगे तो तलाक की संख्या बौनी हो जाएगी । 

कुछ जोड़े ऐसे हैं जिनका सो कॉल्ड पहला प्यार,पहला ब्रेक अप  उनके जीवन में दोबारा आ जाता है और वे शिकवे गीले भुला कर पहला सा जीवन जी लेने की नाकाम कोशिश करते है और घर तोड़ बैठते हैं ।अक्सर इन में से किसी एक का तो पहले से ही बिखरा होता है अब इनका नोस्टाल्जिया दूसरे का भी तोड़ बैठते हैं ।


आपका साथी चीटिंग कर रहा है तो क्या करें ?
जब आपको पता चल गया है तो आप धैर्य से काम लें 
उतेजित मत हों ।उन से बैठ कर बात करें ।उन्हें अपनी बात कह लेने का मौका दें ।आप सख्ती न दिखाए न ही धमकाएं ।
वह गलती राह  पर हैं तो डरे हुए तो हैं ही  और डरा हुआ जीव ही आत्म रक्षा में पहला अटैक करता है वह आपको दोषी ठहरायेगा । आप पर आरोप लगाएगा कि तुम ऐसी नही हो वैसी नही हो ये और वो ।उन आरोपों से आहत हो जाओगे तो बुरा भला गाली गलौच करोगे ।हिंसा पर उतारू होगे ।इस से बेहतर है कि उन्हें ध्यान से सुना जाए ।समझाया जाए ।उन्हें विश्वास में लिया जाए और उन से ही पूछे कि आप बताओं हम आपका साथ कैसे दें ।हम अपने मे क्या क्या परिवर्तन लाएं ।

( आप हम से क्या चाहते हैं ) 
आप उन्हें रिश्ता टूट जाने की स्थिति में क्या क्या हानि हो सकती है वह समझाएं ।उन्हें सोचने और लौटने का वक्त दें 
सब से जरूरी कदम यह है कि अपने परिवार के सदस्यों और  माता पिता को विश्वास में लिया जाए उन से यह समस्या शेयर की जाए ।कभी माता पिता की मध्यस्थता और परिवार का दबाव भी काम कर जाती है ।आराम से बैठ कर शांत चित्त से धैर्य से  बात कर के ही हल निकालना  चाहिए हल इसी बात चीत में ही छिपा होता है लड़ने झगड़ने से कभी  हल नही निकलेगा ।कड़वाहट इतनी बढ़ेगी कि चाह कर भी तेजाब कभी कम नही होगा।

वैध या अवैध संबंधों की परिभाषा अलग अलग संस्कृति यो में तो अलग है ही पर व्यक्तियो की व्यक्तिगत मान्यताओ में भी अलग होंगी ।गलत और सही की परिभाषा सब की अपनी अपनी है।जिस बात को ले कर आप इतना ठगी हुई महसूस कर रही हूं दूसरे साथी की नजर में यह किसी अपराध की श्रेणी में ही न आता हो उसके लिए यह सब  कुछ  मायने ही न रखता हो ।सब लोग अपने विचार संस्कार  अनुभव अनुसार समस्या को अलग ढंग से देखते समझते है । आप अपने मूल्यों को दूसरे पर कभी थोप नही पाएंगी ।दूसरे को अपने जैसा सोचने और मानने को बाध्य नही किया जा सकता ।केवल अपनी सोच को बताया जा सकता है ।
प्रेम वही जो आजादी दे दे पँखो के काट रख लेने से पक्षी उड़ना तो नही भूलता ।बेशक वह अब उड़ न सकता हो पर मन उसका आसमान ही में रहेगा ।उसे उड़ने दीजिये थक कर लौट आएगा ।बस दरवाजा खुला रखिये ।
अनेक बार स्वतन्त्र समाज के विचार के प्रभाव से कुछ लोग बन्धन में घुटन महसूस करते हैं । लेकिन बाद में वह अनुभव करते है कि परिबार या साथी का होना घुटन नही बल्कि ताकत होता है क्योंकि इंसान अकेला नही रह सकता है ।उसे किसी की जरूरत जरूर महसूस होगी ।कुछ लोग ऐसा सोचते है कि वे परिवार भी छोड़ दे और जो नई गर्ल फ्रेंड बनाई है उस से भी न बंधे शादी न करें ।बस यूं ही फ्रीडम में रहे ।वे पश्चिम से प्रेरित हैं वे सब से ज्यादा घाटे में रहेंगे ।क्योंकि कोई भारतीय लड़की चाहे कितने ही वर्ष live इन मे रह ले अंततः वह भी शादी ही करना चाहेगी ।भारत मे रखैल बन कर कोई अभागी ही रहना चाहेगी ।
बाकी रोटी दो भी हो चोपड़ी हुई भी हों तो यह चल नही पायेगा ।
मेरा निजी तौर पर मानना है कि जब न निभ पाये तो अलग हो जाना बेहतर है बजाय कि कोई आत्म हत्या करे ।जीवन बेशकीमती है एक शादी विवाह जैसा बन्धन जीवन को लील जाने के लिए नही है । 


यह पोस्ट सिर्फ महिलाओ  के संदर्भ में लिखी गई है जिनके पति किसी न किसी अनैतिक रिश्ते में है 
इसके एक दम विपरीत अनेक स्त्रियां अनैतिक रिश्तो में हैं या होती है उनका मनोविज्ञान पूर्णता भिन्न है इसलिए उनके विषय मे एक और पोस्ट लिखूंगी फिर कभी ।
सुनीता धारीवाल