बुधवार, 12 फ़रवरी 2020

हम भारत की नारी है
हम दुर्गा शेर सवारी है 
हम शक्ति हम सरस्वती 
हम सारे जग से न्यारी है  
हम पार्वती बन लास्य रमी
हम पुरस्कार अधिकारी है 
हम सेना में  रणचंडी है 
हम हर दुश्मन पे भारी है 
हम ताकत है हम जननी है 
हम से ये सृस्टि सारी है 
हम ऊंचे आकाश में भ्रमण करें 
हम मंगलयान  सवारी है 
हम देवी पीड़ा हरणी है 
हम हाथ तिरंगा धरणी है 
हम ताकत है हिंदुस्तान की 
हर हर महादेव ललकारी है 
हम भारत की सबला नारी है 
हम शक्ति रूप विस्तारी है
(हम काली मां रौद्र रूप धरती )
हम रौद्र रूप काली माई 
हम  पापियों की संहारी है 
हम वंदन करें भारत माँ का 
यह जन्मभूमि हमारी है 
हम भारत की नारी है
 हम भारत की नारी है 
सुनीता धरिवाल
हम यदि जन्म ले पाएंगी
तब ही रौनक बन पाएंगी 
ओ बाबुल तेरे  आंगन में 
हम नाचेंगी और गाएंगी 
 
गाती है हम गुनगुनाती है 
  खेतो में और  खलिहानों मे
पर्वत पर और  मैदानों में 
हम भी कलरव रच जाएंगी 
हम यदि जन्म ले पाएंगी 

हम ही तो है जो गाती है 
गोदी में ले कर  लोरीयाँ
हम वत्सल नाद सुनाती है 
हम ही तुम्हे सुलाती है 
माँ बन कर सृष्टि चलाएंगी
हम यदि जन्म ले पाएंगी 

हम ही तो हैं जो गाती है 
जच्चा और सोहर की कलियां 
हम बन्ना बन्नी गा गा कर 
हर देहरी रंग जमाती है 
रुदाली के भी वचन भरेंगी 
हम यदि जन्म ले पाएंगी

हम ही तो है जो गाती है 
 मंदिर मंदिर भजन आरती 
घर मे भी नाद बजाती है 
गुरुद्वारे में पाठ करेगीं 
हम भवसागर तर जाएंगी 
हम यदि जन्म ले पाएंगी 

हम ही तो है जो पीड़ा में भी 
गाना कहाँ छोड़ती है 
हम तड़पी  बिरहा गीतों में 
हम दुख को सदा मोड़ती है 
हम प्रेम श्रंगार सब गाएंगी 
हम यदि जन्म ले पाएंगी 

न हिंसा हो न उत्पीड़न हो 
न हत्या हो न तेजाब डले 
न हो  जोर जबरदस्ती हम से 
न खरीदी बेची जाएंगी 
हम दुनिया की बुरी नजर से 
जब बच कर रह पाएंगी 
हम तब ही तेरे आंगन में 
चिडीया सी चहकती पाएंगी 
हम गाएंगी गुनगुनाएँगी 
हम जग की रौनक बन जाएंगी 
हम यदि जन्म ले पाएंगी 

सुनीता धारीवाल

सोमवार, 10 फ़रवरी 2020

कितनी बार फिसले

 मुट्ठी से मेरी  रेत की तरह

 लम्हे जो बहुत अजीज थे 

रिश्ते जो बहुत करीब थे 

भला कहाँ खरीद पाए  सब 

हम भी कितने गरीब थे 

डूबे नहीं वो कभी मेरे  संग 

जितने  भी मेरे हबीब थे 

कितनी ही बार फिसले 
मेरी आँख से 

अनकहे शब्द मेरे 

जो कह दिए जाने  के करीब थे 

शेष फिर 
सुनीता धारीवाल

रविवार, 2 फ़रवरी 2020

हाथों हाथ पढ़ ही डालिेये  ये पोस्ट पोस्ट 

कोई हाथ मल रहा है 
कोई हाथ दिखा रहा है 
कोई हाथ कटवा रहा है 
कोई हाथ  जोड़ रहा है 
कोई हाथ तोड़ रहा है 
कोई हाथ हिला रहा है 
कोई हाथ मिला रहा है 
कोई हाथ मांग रहा है 
कोई हाथ  मांज रहा है 
 कोई हाथ  मार रहा है 
कोई हाथ सेंक रहा है 
कोई हाथ फेर रहा है 
कोई हाथ पकड़ रहा हैं 
कोई हाथ हटा रहा है 
कोई हाथ जला रहा है 
कोई  किसी का  हाथ देख  रहा है
किसी के हाथ कुछ लग नहीं रहा 
किसी के हाथ बहुत कुछ लग गया 
किसी के  हाथ में कुछ नहीं रहा 
किसी के हाथ में बहुत कुछ आ गया 
किसी के हाथ में रेखा नहीं नहीं 
किसी के हाथ छिल गए 
कोई बस हाथ की खा रहा है 
आप भी जोड़ दीजिए बाकी -----
मुझे पता है आपके हाथ कहाँ निचले रहने वाले है आप भी  हाथ आजमाओगे ज़रूर 

देखा कितनी  तरह से हिंदी भाषा में हाथ शब्द का उपयोग  करते है
दीवारे खाली है 
उनकी जो चले गए ।
अब कोई नहीं झांकता 
उन profile में 
जो कभी रौनक बन के
 हंसती गुनगुनाती रहती थी 
क्या खाया क्या पीया 
कया पाया क्या खोया 
सब कुछ तो साँझा करते थे 
अब नहीं हैं वो

मंगलवार, 28 जनवरी 2020

जब मैं खुद के पास होती हूँ  
तब  मैं बहुत उदास होती हूँ 

तब शब्द घुमड़ने लगते है 
अक्षर भी उड़ने लगते है 

मन कागज़ होने लगता है
दिमाग की कलम सरकती है

दिल की हर परत दरकती है
 और कविता होने  लगती है

फिर बेबस  सी हो जाती हूं
और कलम उठाने भगती हूँ 

कागज़ फिर रंगने लगती  हूँ 
 ये उदासी  भंगने लगती हूँ 

फिर शब्द जो आने लगते है 
कितने जाने  पहचाने लगते है 

खींचती जाती हूँ विषम लकीरें सी 
 सबके मतलब  बनते जाते है

अभी लिख रही हु शेष भी शीघ्र ---sd

शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

 ऐसा नही कि हमको मोह्हबत नही मिली 
पर जैसी चाहते थे वैसी नही मिली 
जो भी मिला जिंदगी में बहुत देर से मिला 
जब जब जरूरतें थी तब तब नही मिला 
 तुम क्या मिले मुझे मिल कर मिले नही 
बस जीते मरते जीते जाना पर  जीना नही मिला